Tuesday, 23 September 2014

गुरु(Jupiter) ग्रह और उसका प्रभाव

गुरु(Jupiter) ग्रह और उसका प्रभाव 
गुरु, जैसा नाम वैसा ही प्रभाव , जिस किसी की कुंडली में गुरु का अच्छा प्रभाव है , निःसंदेह वह व्यक्ति एक अच्छा इंसान होगा , गुरु के मजबूत होने पर व्यक्ति धार्मिक स्वभाव का , समाज के प्रति चिंतनशील , दूसरों की सहायता करने वाला तथा दूसरों पर तुरंत विश्वास करने वाला होता है , प्रवृत्ति थोड़ी आलसी होती है।  परन्तु यदि गुरु ख़राब हो तो नास्तिक स्वभाव , माता - पिता और स्वजनों से बैर रखने वाला और कुत्सित विचार धारा वाला होता है।  मीठे के प्रति रूचि तथा थोड़ा स्थूल शरीर जरूर होगा।  मधुमेह तथा थॉइरॉइड जैसी समस्या होने की प्रबल सम्भावना होती है। अच्छे गुरु वालों के पास धन हो या ना हो परन्तु इंसानियत अवस्य होती है और इन पर बुरे वक्त में आँख बंद कर भरोसा किया जा सकता है। यदि आपका गुरु अच्छा है तो व्यसन और मांसाहार से दूर रहें , गुरु का अच्छा होना सौभाग्य की बात है।
पं. दीपक दूबे (Astro Deepak Dubey)

Saturday, 20 September 2014

बुध(Mercury ) ग्रह और उसका प्रभाव

बुध(Mercury ): कुंडली में मजबूत बुध सोचने - समझने , तर्क करने , वाकपटुता तथा निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है। गणितज्ञ , वैज्ञानिक , तर्कशास्त्री , शिक्षक , वकील , सफल व्यापारी इत्यादि में यह मजबूत होता ही है। बुध से प्रभावित व्यक्ति की सोच तीव्र होगी इसमें कोई संदेह नहीं है , परन्तु वह सोच सकारात्मक होगी या नकारात्मक यह बुध की स्थिति तथा अन्य ग्रहों से युति पर निर्भर करता है , राहु के साथ मजबूत बुध व्यक्ति को जोड़ - तोड़ में पारंगत बना देता है , सच को झूठ और झूठ को सच बताने तथा मनवाने की अद्भुत क्षमता होती है इनमे, विशेष कर यदि यह लग्न , दूसरे या पंचम भाव में हो तो। बुध से पित्त तथा चर्म रोग होने की प्रबल सम्भावना बनती है , छठे , सातवे या आठवे भाव में बुध -शुक्र -मंगल की युति सेक्स सम्बन्धी अक्षमता प्रदान कर सकता है , ख़राब बुध नपुंसकता का सबसे बड़ा कारक है।
ॐ नमः शिवाय !

मंगल (Mars)

मंगल : मंगल से यदि लग्न का सीधा सम्बन्ध हो और शुभ ग्रहों का भी प्रभाव हो तो व्यक्ति सदैव युवा जोश से भरा रहता है और हमेशा अपनी वास्तविक उम्र से कम का दिखता है , आत्मविश्वास और दूसरों की रक्षा करने की भावना से ओत - प्रोत होता है। परन्तु अकेला या दूषित ग्रहों का प्रभाव हो तो शक्तिशाली और आत्मबल की अधिकता तो तब भो रहेगी परन्तु क्रोध , उदंडता , निर्दयता और अहंकार की भी अधिकता हो जाती है। मंगल से प्रभावित हैं तो क्रोध और अहंकार से बचें , अन्यथा शनि और राहु दिन में तारे दिखा देते हैं। 
ॐ नमः शिवाय !

Tuesday, 16 September 2014

चंद्रमा(The Moon) :

चंद्रमा : चंद्रमा किसी भी व्यक्ति की कुंडली सबसे अधिक प्रभावित करने वाला ग्रह है , क्योंकि इसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य , मन और धन तीनों पर ही पड़ता है चाहे यह कहीं भी बैठा हो।
कमजोर चंद्रमा के कारण आत्मबल में कमी , उदासीनता , अकेलापन , आर्थिक विषमता , पारिवारिक सुख में कमी तथा कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है , कई बार यह अधिक दूषित होने पर व्यक्ति को नशे तथा व्यसन का आदी बना देता है , इसके बुरे प्रभाव से व्यक्ति मनोरोगी तथा निकम्मा तक हो सकता है।

वहीं मजबूत चंद्रमा इसका विपरीत प्रभाव देता है, हंसमुख चेहरा , भरपूर आत्मबल , पारिवारिक सुख , आर्थिक स्थिरता तथा पुरुषों की कुंडली में स्त्रियों का सम्बन्ध तथा सहयोग बढ़ा देता है। 

Monday, 15 September 2014

सूर्य (Sun):

सूर्य : कुंडली में मजबूत सूर्य से उत्साह , समाज में सम्मान , कमजोरों की मदद करने की भावना , तथा अद्भुत प्रशासनिक क्षमता होती है, परन्तु इन सभी गुणों के साथ - साथ अहंकार की अधिकता होने की सम्भावना भी बहुत अधिक होती है। यदि आपका सूर्य अच्छा है तो अहंकार से बचें , अन्यथा शनि की दशा, साढ़े साती या ढैया अत्यंत कष्टकारी हो जाएगी , और अहंकार टूट जायेगा !

Friday, 12 September 2014

मांगलिक दोष

मांगलिक दोष : अधिकांशतः लोग मांगलिक कुण्डलियाँ स्वयं या कंप्यूटर से मिला लेते हैं। लड़के और लड़की  की कुंडली में यदि मांगलिक दोष मिल गया तो प्रसन्न होकर स्वयं ही फैसला ले लेते हैं और विवाह कर लेते हैं। जबकि यह बहुत बड़ा भ्रम है।  यह बात आज इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि किसी को मांगलिक दोष था और दोनों कंप्यूटर से मांगलिक दोष का निर्णय देखकर विवाह कर बैठे , नतीजा परेशानियां शुरू , किसी ने सलाह दे दी कि आप दोनों दुबारा शादी कर लो , दोष खत्म हो जायेगा।
मंगल की उपस्थिति और दृष्टि अपने घर और उच्च राशि के अलावा हानिकारक ही होती है , अलग - अलग भाव से बनने वाली  मांगलिक कुंडली के कारण वैवाहिक जीवन में अलग - अलग तरह की परेशानियां आती हैं , जैसे -
  1. आर्थिक समस्या के कारण वैवाहिक जीवन में अत्यधिक तनाव फिर संबंध विच्छेद या दुरी
  2. सास - ससुर से ना निभने के कारण पति - पत्नी में अत्यधिक तनाव फिर संबंध विच्छेद या दुरी
  3. किसी के अत्यधिक क्रोध और वैचारिक मतभेद के कारण अत्यधिक तनाव फिर संबंध विच्छेद या दुरी
  4. और सबसे खतरनाक जीवन साथी की मृत्यु के कारण संबंध विच्छेद

बेहतर हो वैवाहिक बंधन में बंधने से पूर्व किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श ले लें , अन्यथा बाद के दुःख असहनीय होते हैं , और हाँ दूसरी बार विवाह करना समाधान  नहीं है , इसका एक मात्र उपचार मन्त्र अनुष्ठान ही है।
ॐ नमः शिवाय
ज्योतिषविद पं. दीपक दूबे